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Hometown

Hometown  फ़िलहाल मैं अपने घर हूँ और बहुत ठीक हूँ, कुछ प्रख्यात विश्वविद्यालों मैं मेरा चयन भी हो गया है अब आप ये पूछना चाहएँगे कि कौनसे मे , जवाहरलाल नेहरू  विश्वविद्यालय , जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय, तेरी स्कूल और उच्च शिक्षा और भी एक दो मैं हो गया  है लेकिन सही कहु तो इस वर्ष मेरा बिल्कुल कॉलेज की पढ़ाई या किसी के नीचे या नंबर्स का दवाव  महसूस एनएचआई करना चाहता हूँ लेकिन देखिए क्या होता है। आजकल लगभग सभी मित्रो से मित्रता कम कर दी है जो की ठीक भी है। सभी मित्रता मोबाइल दुनिया से भी ख़ुद को अलग कर लिया है, जिसका असर मुझे दिख भी रहा है लेकिन जब चुपके से और ख़ुद से बचकर मैं जब  किसी पुराने मित्र से बात करता हूँ तो लगता कहीं मैं धीरे तो नहीं चल रहा हूँ , लेकिन नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। आजकल मैं मंटो, फ़ैज़ साहब, गांधी, मर्क्स , लेनिन, विलियम कुछ भारत और दुनिया से संबंधित किताबों काफ़ी जोर से पढ़ रहा हूँ।  जैसे            और भी दुख है जामने मैं मोहब्बत के सिवा,           रहते और भी वस्ल की राहत के सिवा, ...

Samvad 1

Aaj Khali Baitha hu शायद तक़दीर और समझ मे  एक ही फ़र्क़ है वह भी सिर्फ़ सिर्फ़ आपकी उसकी कुछ चंद महीनों की ही समझ है। कुछ ख़राब हो जो अजीब लगता है, कुछ अच्छा हो तो भी अजीब लगता है खैर। आख़िरी बार मैंने यहा कुछ लिखा वह भी Hometown पर लिखा था। बीते कुछ चंद महीनों मे मैंने ये ज़रूर सीख लिया की अगर ज़िंदगी थोड़ी से समझनी है तो हर किसी से बात करो जानो लोगो को और उससे भी ज़्यादा जरूरी है ख़ुद को। और खुद को १०% जान लिया शायद हाँ भी और न भी। कुछ प्रेम संबंध और ख़त्म करे, दोस्ती कम करदी, लोग कम करदिये किताबे पढ़ी। चाइना जाने का मौका था लेकिन नानी से वादा करा कम से कम निभा तो लू और प्रखर बनना पढ़ेगा।  लाजवाब है मेरी तन्हाई भी कुछ मेरे ही समझ के बाहर है मेरी तन्हाई भी , कुछ मज़े मे है मेरी तन्हाई भी, कुछ साथ के मेरी तन्हाई भी, ऊपर शिखर तक पहुचने की है मेरी तनिहाई भी, कुछ नीचे धड़ाम से गिरने की है मेरी तन्हाई भी। अभी कुछ महीनों मैं मेरी शायद मैं CDS की परिषा दु, देखते क्या हिता है, हो सकता है निकल जाऊ हो सकता अधर मैं रह जाऊ। और आज ही मैं सोच रहा था कि काश नानी अभी जीवनी लिखती और यूएस किता...