Samvad 1

Aaj Khali Baitha hu

शायद तक़दीर और समझ मे  एक ही फ़र्क़ है वह भी सिर्फ़ सिर्फ़ आपकी उसकी कुछ चंद महीनों की ही समझ है। कुछ ख़राब हो जो अजीब लगता है, कुछ अच्छा हो तो भी अजीब लगता है खैर। आख़िरी बार मैंने यहा कुछ लिखा वह भी Hometown पर लिखा था।

बीते कुछ चंद महीनों मे मैंने ये ज़रूर सीख लिया की अगर ज़िंदगी थोड़ी से समझनी है तो हर किसी से बात करो जानो लोगो को और उससे भी ज़्यादा जरूरी है ख़ुद को। और खुद को १०% जान लिया शायद हाँ भी और न भी। कुछ प्रेम संबंध और ख़त्म करे, दोस्ती कम करदी, लोग कम करदिये किताबे पढ़ी। चाइना जाने का मौका था लेकिन नानी से वादा करा कम से कम निभा तो लू और प्रखर बनना पढ़ेगा। 

लाजवाब है मेरी तन्हाई भी कुछ मेरे ही समझ के बाहर है मेरी तन्हाई भी ,
कुछ मज़े मे है मेरी तन्हाई भी, कुछ साथ के मेरी तन्हाई भी,
ऊपर शिखर तक पहुचने की है मेरी तनिहाई भी, कुछ नीचे धड़ाम से गिरने की है मेरी तन्हाई भी।


अभी कुछ महीनों मैं मेरी शायद मैं CDS की परिषा दु, देखते क्या हिता है, हो सकता है निकल जाऊ हो सकता अधर मैं रह जाऊ।
और आज ही मैं सोच रहा था कि काश नानी अभी जीवनी लिखती और यूएस किताब से लाखो लाखो विद्यार्थीयो को प्रेरणा देती की सिर्फ़ तीन कपड़ो में भी अपनी ग्रेजुएशन करी जा सकती है। 

लेकिन वादा रहा पहुचूँगा बहुत शिखर पर पहुचूँगा अपनी मृत्यु तक।

- abhay Pandey,  
  founder ghee & guts

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